मुश्ताक़
मुश्ताक़ आशिक कुछ और नहीं कामयाब शोखियों की निशानी है
सितारे ज़मिन्दोस्त हैं या उनकी मौजदूगी यूँ नूरानी है
तजुर्बे अख्तियार करके भी अब क्या कर लेंगे हम
ये मामला नही है लफ़्ज़ों का ,ये सिलसिला रूहानी है
नासमझ हैं जो देख नही पाए , हमारी हर बात कुछ रूमानी है
लम्हों में सिमट जाये है वक़्त
हर ख्वाहिश अब बेमानी है
मुदतों बाद हुई है मैकशी इस कदर
ये मामला नही है लफ़्ज़ों का, ये सिलसिला रूहानी है
अल्फाज़ खोज लूँ तो बातें कर लूँ दो चार
अभी हर दास्ताँ बेज़ुबानी है
साँसों ने कर ली है बगावत और हुस्न की निगरानी है
होश हो कायम तो नज़र मिला लेंगे हम
ये मामला नही है लफ़्ज़ों का, ये सिलसिला रूहानी है
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