अफरोज़
ख़ामोश बज़्म में शरारत कोई शर्गोश हो गई है
जुबां किसी की यूँ हमें मदहोश कर गई है
खूब ऐतबार था हमें गुफ्तगू के हुनर पे
एक आवाज़ उनकी हमें खामोश कर गई है
हमारी मशहूर थी बड़ी, सौबत में उनकी रंग फरोश हो गई है
खैरियत शब् की हुई अर्श इस तरह, बात यही ख्वाब मेरे फरामोश कर गई है
रूह-ब-रूह हुए हैं उनसे जब से हम
एक नज़र उनकी हमें अफरोज़ कर गई है
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